tag:blogger.com,1999:blog-64630082008-01-07T11:39:37.435+05:30हृदयगाथाSanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comBlogger47125tag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1155654475305013482006-08-15T20:37:00.000+05:302006-08-15T20:37:55.316+05:30वाह...क्या बात है<p>माईक्रोसोफ्ट ने नया सोफ्टवेयर निकाला है - विन्डोज़ लोईव राईटर जो चिट्ठे विज़ीविग (WYSIWYG) में लिखने देता है। शायद चिट्ठाकारी का नया जोश आ जाये</p>Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1086151840439503382004-06-02T10:06:00.000+05:302004-06-02T10:20:40.440+05:30इंद्र की नगरी इंदौरइंदौर आने के मौके बार बार नहीं लगते, खासकर जब इंदौर में सोफ्टवैयर कंपनीयाँ ज्यादा नहीं हैं। तो जब माईक्रोसोफ्ट ने MSDN यात्रा का न्योता दिया तो तुरंत झपट लिया। ईस बार .NET interoperability पर session है। फिर कुछ दिन छुट्टिया और मित्रों के साथ पुराने दिनों की याद ताज़ा करना। और उसके पश्चात वापस मुंबई पहुँच कर कोल्हू के बैल जैसे वापस जुत जाना।
<br />Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1085044925868227592004-05-20T14:52:00.000+05:302004-05-20T14:52:05.866+05:30<a href='http://photos1.blogger.com/img/166/941/640/Sunset.jpg'><img border='0' style='border:1px solid #000000; margin:2px' src='http://photos1.blogger.com/img/166/941/320/Sunset.jpg'></a><br />Testing BloggerbotSanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1085039137087640132004-05-20T13:15:00.000+05:302004-05-20T13:27:02.013+05:30नई शुरुवातब्लौगर के नये रूप के बाद पहला चिट्ठाSanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1081862416222727372004-04-13T18:50:00.000+05:302004-04-13T18:54:11.153+05:30हिन्दी ब्लॉगजगत में सन्नाटालगता है की शुरूवाती उत्साह के बाद हिन्दी जगत में सन्नाटा सा छा गया है| आशा करता हूँ की ये गरमीयों की छुट्टीयों की वजह से है ना की उत्साह की कमी से|
<br />कल किसी मित्र की मदद करते हुए पाया की windows xp जहाँ हिन्दी तो दिखाता है MSN Messenger में, वहीं गुजराती की जगह सिर्फ बक्से दिखाता है| पता चला की Arial Unicode MS फोन्ट बदलने पर ही चलता है| ऐसा क्यूँ ? किसी को मालूम हो तो बतायें|
<br />यहे शायद गुजराती में ना दिखे - કેમ છૌ? મજા મા છૌ?Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1081352556350794622004-04-07T21:12:00.000+05:302004-04-07T21:16:23.043+05:30ऐक चिड़िया80 के दशक में बडे होते हुए दूरदर्शन का आगमन अभी भी याद है| 1982 मैं एशियाड खेलों का प्रसारण इंदौर में पहली बार दूरदर्शन को नगरी में लाया था| उसके पहले बंबई यात्राओं का दौरान श्नेत-वर्ण टीवी पर चित्रहार देखा करते थे| कुछ समय बाद दूरदर्शन के जनहित संदेश प्रसारित होने लगे, खासकर देश की एकता पर क्या आपको याद है? <a href="http://mmslb.eonstreams.com/recreate/cdaudio/wm/1194_ek_anek_aur_ekta_56k.wmv ">http://mmslb.eonstreams.com/recreate/cdaudio/wm/1194_ek_anek_aur_ekta_56k.wmv </a>Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1081245294620271702004-04-06T15:24:00.000+05:302004-04-06T15:28:39.280+05:30ईश्तहार रहित ब्लॉगकुछ समय से ईस ब्लॉग पर ब्लॉगर का ईश्तहार नहीं दिख रहा है| यह उन्ही ब्लॉग्स पर होता है जो मुफ्त नहीं है| ईसका कारण है की ऐक और बॉडी टैग जौ की commented है|Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1080986086168577122004-04-03T15:24:00.000+05:302004-04-03T15:28:27.466+05:30orkut और हिन्दी ब्लॉगर्सकुछ समय से मैं orkut के नैटवर्क पर हूँ| मेरे स्वीडन के ऐक मित्र <a href="http://www.indien.nu">हैनरिक</a> को आमंत्रित किया जोकि भारतप्रेमी है| उन्होनें आते से ही इंडिया और इंडियन फूड communities में खुद को जोड लिया| उसके बाद मेरे मन में विचार आया की क्यो ना सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को न्योता दिया जाए orkur पे आने का| समस्या यह है की orkut पर आप स्वयं आमंत्रित नहीं कर सकते है| अगर आप कोई हिन्दी ब्लॉगर्स की community join करना चाहे तो कृपया मुझे आपका विपत्र दे ताकि मैं आमंत्रण भेज सकूँ| Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1080581042917017822004-03-29T22:54:00.000+05:302004-03-30T00:28:56.483+05:30हिन्दी ब्लॉग स्थानांतर<a href="http://http://hindi.pnarula.com/haanbhai">हाँ भई</a> के हिन्दीकरण को देख कर मुझे भी साहस मिल रहा है मेरा हिन्दी ब्लॉग स्थानांतरण करने का| शायद ब्लॉगस्पॉट से पूर्णतः विदा लेने का समय आ रहा है| मैं आशा करता हूँ की पंकज जी हिन्दीकृत templates का योगदान दे कर सहायता करेंगे|Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1080398431643767942004-03-27T20:10:00.000+05:302004-03-30T00:30:05.670+05:30WBEditor<p> कुछ दिनों पहले मैंने <a href="http://wbeditor.cweblogs.com">WBEditor</a> देखा| Microsoft.NET में लिखा हुआ और आकर्शिक जमाव वाला ये dekstop blogging tool है| पहले मैंने इसका अपने <a href="http://mblog.com/sanjayvyas">अंग्रेज़ी ब्लॉग</a> पर उपयोग किया, फिर अपना ध्यान केंद्रित किया हृदयगाथा पर, लेकिन यह पता चला की जहाँ या चीनी और जापानी भाषायों का समर्थन करता है, यह हिन्दी का सम्पूर्ण समर्थन नहीं कर पा रहा था| उनके support के साथ 3-4 विपत्र के आदान-प्रदान के बाद उन्होनें यह खुशखबरी भेजी की RC2 अब हिन्दी-समर्थित है| भई, मज़ा आ गया.. यह भी मैं WBEditor में ही लिख रहा हूँ| अगर आप चाहें तो आप भी इस मुफ्त program का लाभ उठा सकते हैं| </p>Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1080053326364546732004-03-23T20:18:00.000+05:302004-03-23T20:22:12.310+05:30FireFoxकुछ समय से FireFox ब्राउज़र का इस्तमाल कर रहा हूँ पर कुछ दिक्कते आ रही हैं| ऐक तो यह की हिन्दी की साईट ठीक तरह से नहीं दिखती हैं, जैसे की पंकज का ब्लौग कुछ इस तरह दिखता है...
<br /><br/>
<br /><img alt="haanbhai.JPG" src="http://www.mblog.com/sanjayvyas/images/haanbhai.JPG" width="516" height="401" border="0" />
<br /><br/>
<br /><br/>
<br />और दूसरी बात ये की FireFox में popup window में encoding बदलनें का तरीका समझ में नहीं आया
<br /><br/>
<br /><img alt="encoding.JPG" src="http://www.mblog.com/sanjayvyas/images/encoding.JPG" width="524" height="448" border="0" />
<br /><br/>
<br /><br/>
<br />अगर आप जानते हैं तो कृपया बतायें...धन्यवाद|
<br />
<br />
<br />Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1080050365777503642004-03-23T19:29:00.000+05:302004-03-23T23:36:22.153+05:30हिन्दी webringहिन्दी webring पर कुछ समय से काफि दिक्कतें आ रही थी| जैसे हृदयगाथा - हृदयग[]?था बन जाती थी| फिर देबाशीशजी ने सहायता की और मैं हृदयग[]?था को सुधारने में सफल हुआ, धन्यवाद देबाशीशजी| देबाशीशजी ने कुछ समय पहले बताया था की वे कई और webrings के मैनेजर है इसलिये मैंने हिन्दी webring का स्वामित्व भी उनको सौंप दिया है| आशा है वे हिन्दी चिट्ठाकारों के काफिले को काफी आगे तक ले जायेंगे|
<br />Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1079522877923158852004-03-17T16:57:00.000+05:302004-03-17T17:01:15.560+05:30किसकी माँऐसा मेरे मित्र के साथ ही क्यों होता है? :)
<br />
<br />मेरा मित्र क्षमल की कक्षा लेने.. विषय पढ़ाने के बाद उसने कक्षा को कुछ अभ्यास दिये| कक्षा के पिछले हिस्से में बैठा ऐक विद्यार्थी कुछ कुछ बुदबुदा रहा था| शिक्षक कुछ नज़दीक पहुँचा तो उसके कान में अभद्र सी भाषा सुनाई दी - "इसकी माँ का...error"... शिक्षक लालपीला होता हुआ विद्यार्थी के समीप पहुँचा और कडक आवाज में बोला "यह क्या हो रहा है, और इस तरह की भाषा को प्रयोग क्यों हो रहा है"? विद्यार्थी नें अचम्भे से उनकी तरफ देखा और मिमियाते हुऐ बोला "सर, इसकी माँ (schema) का error आ रहा है"| यह सुनते ही शिक्षक अपनी हँसी दबाता हुआ बोला "ओह! ठीक है, ठीक है" और वहाँ से खिसक लिया|
<br />
<br />यह कोई चुटकुला नहीं है, हकीकत घटना है और शिक्षण के दौरान इस तरह के कई वाक्ये हो जाते हैं|
<br />Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1079284382403999682004-03-14T22:43:00.000+05:302004-03-15T14:08:45.233+05:30नया चिट्ठामैं कई दिनों से चिट्ठाकारी नहीं कर पाया हूँ क्योंकि मैं ऐक नये चिट्ठास्थल बनाने में जुटा हुआ था| मेरे अंग्रेज़ी ब्लौगर के जालस्थल <a href="http://sanjayvyas.blogspot.com">http://sanjayvyas.blogspot.com</a> पर पिछले कुछ दिनों से काफी दिक्कतें आ रही थी, खासकर टेम्पलेट की जो अचानक गायब हो जाता है| यह तो शुक्र है की मैंने ऐक प्रति अपने पास संभाल कर रखी थी वरना मुझे सब कुछ फिर से बनाना पडता| इस घटना से त्रस्त होकर मैंने विकल्प ढूंढने शुरू किये और <a href="http://www.mblog.com ">http://www.mblog.com</a> पर आ टपका| अच्छा लगा क्योंकि मुफ्त होने के बावजूद ये ईश्तहार-रहित है, टिप्पणीयाँ, विपरीथ-पथ और कई खूबियाँ मौजूद हैं| अगर मौजूद नहीं है तो हिन्दी समर्थन|Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1078992933794653042004-03-11T13:45:00.000+05:302004-03-11T13:48:43.263+05:30क्या हम जाहिल हैं ?दो दिन पहले NDTV पे ऐक कार्यक्रम देख रहा था जिसका विषय था - "क्या हिन्दी हास्य कवि सम्मेलन अब इतना लोकप्रिय नहीं रह गया है" | मंच पर बैठे हुऐ साजिद खान ने ऐक वक्त यह का डाला की "भारत में श्रोतागण अनपढ़ और जाहिल हैं (मैं अनुवाद नहीं कर रहा हूँ, उन्होनें यह हिन्दी में ही बयान किया)| बडे शहरीवासियों का, खासकर मुंबईवासियों का यह मानना है कि वे बुद्धिजीवी हैं और छोटे शहरों और गावों में रहने वाले सब जाहिल हैं| साजिद खान स्वयं को बहुत उम्दा हास्यकार मानते है जबकी मैं सोचता हूँ कि वे सिर्फ फूहड़ हास्य ही कर पाते हैं| उन्हें करारा जवाब दिया हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा नें (चार लाईना होशरत वाले) की स्वयं पर हास्य (self deprecating humour) हास्य है, व्यक्तिविषेश हास्य (जो साजिद खान हमेशा से करते आएँ है) फूहडपन है| मुझे साजिद खान की सोच पर तरस आता है की वे अपनी अमैलिकता एवं हास्यरस के अभाव को श्रोता की जाहिलता पर थोपना चाहते हैं| मैं नहीं मानता की वे कभी भी 'चुपके चुपके', 'जाने भी दो यारों' या हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा की ऊचाईयों की छू पायेंगे|
<br />
<br />आपकी क्या राय है|
<br />
<br />Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1078926958070852482004-03-10T19:25:00.000+05:302004-03-10T19:56:24.263+05:30ईस्को किस्कोयह किस्सा मेरे ऐक मित्र के साथ इंदौर मे हुआ था|
<br />
<br />मेरा मित्र इंदौर में ऐक कंपनी में लिनक्स डालने की कोशिश कर रहा था, पर जाने क्यों लिनक्स राजी ही नही हो रहा था| उसे अच्छा खासा अनुभव भी है लिनक्स पे, पर शायद कुछ हार्डवेयर की समस्या होगी पर जनाब ने भी शायद ठान ही ली थी लिनक्स से भिडने की| 3-4 घंटे तक जूझने के उपरांत भी जब लिनक्स स्थापित नहीं हुआ तो समीप बैठे एक महानुभाव ने कहा "मैं ईसको ले कर आता हूँ"| मेरा मित्र पहले से ही त्रस्त था, उसने पूछा "किस्को"?| महानुभाव ने फिर से कहा "ईस्को" जिस पर पहले से ही झल्लाये हुए मित्र ने कहा "अरे ईस्को किस्को"? अब महानुभाव भी झल्ला के बोले "ईस्को यूनिक्स" (SCO UNIX)| यह सुनते ही मेरा मित्र हँसी से लोटपोट हो गया और महानुभाव उसको अचरज की निगाहों से देख रहे थे कि लिनक्स के बजाय ईस्को यूनिक्स की प्रस्तावना क्यो इतनी हास्यस्पद है|
<br />
<br />Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1078842723289353552004-03-09T20:02:00.000+05:302004-03-09T20:05:10.090+05:30क्या आप हिन्दी.नैट कम्पाईलर उतारना चाहते हैं ?राज चौधुरी ने आज हिन्दी.नैट कम्पाईलर की प्रति यहाँ रखी है <a href="http://rajch.europe.webmatrixhosting.net/PostPage.aspx?085128f3-82d3-4b54-912a-48605a4255f6">http://rajch.europe.webmatrixhosting.net/PostPage.aspx?085128f3-82d3-4b54-912a-48605a4255f6</a> | याद रहे की आपके पास Microsoft.NET Framework होना ज़रूरी है जोकि Microsoft के जालस्थल पर मुफ्त है |Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1078390219970218112004-03-04T14:16:00.000+05:302004-03-04T14:50:17.246+05:30जैक एण्ड जिल अब हिन्दी (बिहारी) में?जैकवा और जिलवा गये उपर द हिल,
<br />पनिया भरिल के वास्ते|
<br />जैकवा गिर गयिल, ऊका खोपडिया फट गयिल,
<br />और जिलवा आवत लुडकन पूरे रास्ते|
<br />
<br />[<a href="http://www.arnab.org/blog/2004/03/index.php#000543">अर्नब के द्वारा</a>]Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1078315183288328442004-03-03T17:25:00.000+05:302004-03-03T17:37:02.513+05:30हिन्दी.नैट कम्पाईलर आ गया<strong>धन्य हो <a href="http://rajch.europe.webmatrixhosting.net">राज चौधुरी </a>का जिन्होने. आखिरकार हिन्दी.नैट कम्पाईलर बना ही लिया| उनकी तकनीकी विद्या का लोहा मानना ही पडेगा</strong>
<br />
<br /><font face="'Courier New',Courier,monospace" size="3">
<br />टिप्पणी यह है हिक भाषा
<br />
<br />टिप्पणी Variables ऐसे declare किये जाते हैं
<br />समझो a है अक्शर
<br />समझो b है संख्या
<br />समझो c है सत्यमिथ्या
<br />समझो i है संख्या
<br />
<br />टिप्पणी यह output है
<br />लिखो "हिक भाषा मे आपका स्वागत है"
<br />लिखो "संजय व्यास को समर्पित"
<br />लिखो "जय गुरु"
<br />
<br />टिप्पणी Assignment सामान्य है
<br />टिप्पणी नोट करें, सत्यमिथ्या (Boolean) को [] मे डालना जरूरी है
<br />i = 20
<br />b =32
<br />a = "21"
<br />c = [b<10]
<br />
<br />टिप्पणी यह complex output है
<br />लिखो b
<br />लिखो [b>10]
<br />लिखो [c]
<br />लिखो a
<br />लिखो a & " Hello"
<br />
<br />टिप्पणी ये रहे Branch और Loop
<br />यदि [b<30]
<br /> लिखो "B < 30"
<br />अन्यथा
<br /> जबतक [i>15]
<br /> लिखो i
<br /> i = i - 1
<br /> अंत जबतक
<br />अंत यदि
<br /></font>Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1077894825693482352004-02-27T20:30:00.000+05:302004-02-27T20:46:37.670+05:30हिन्दी.नैट कम्पाईलरराज चौधुरी ने आज बताया की उनका हिन्दी.नैट कम्पाईलर लगभग पूर्ण हो गया है| आशा करता हूँ की वे ऐक प्रति शीघ्र ही beta-testing का लिये भेजेंगे| देखना यह है की वे इसे C# या VB.NET के तर्ज़ पर बनाते हैं| क्योंकि उनके और मेरे बीच इसी बात को लेकर द्बंद होता आया है| इतना ही नहीं, माइक्रोसोफ्ट ने ऐक सेमिनार में हम दोनों को ऐक ही साथ ऐक ही मंच पर खडा कर C# और VB.NET के बीच सेशन करवाया था की कौनसी लैंग्वेज ज्यादा अच्छी है| बडा मज़ा आया था उस वाक् युद्ध में|
<br />Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1077702992582717452004-02-25T15:16:00.000+05:302004-02-27T14:55:56.903+05:30शुद्ध हिन्दीजब से मैंने हिन्दी चिट्ठाकारी शुरू की है, कई मित्रों का कहना यह है की चिट्ठों का स्तर बहुत ऊँचा है (हालांकी मेरा मानना यह है की 20 साल के अंग्रेज़ी माहौल के बाद मेरी हिन्दी का स्तर गिर गया है) | मुझे मेरे ऐक दोस्त का चुटकुला याद आता है:
<br />
<br />हिन्दी की परीक्षा देकर विद्यार्थी कक्षा से निकला और अपनी साईकल निकाली तो पता चला की पहियें में हवा नहीं है| वह अपनी साइकल घसीटता हुआ पञ्चर की दुकान पे पहुचा| उसने टेमरू ( इंदौरी शब्द - पञ्चर की दुकान पर बैटने वाले बालकों के लिये) से शुद्ध हिन्दी में कहा - "हे पवनठूसर, मेरी मानवचालित द्विचक्री वाहनी के द्वितीय चक्र में से पवन का पलायन हो चुका है, अतः आप से करबद्ध होकर निवेदन है की आप अपने पवनठूसक यंत्र से तनिक पवन का प्रवेश करायें|"
<br />टेमरू ने जवाब दिया - "हट्टे कट्टे होके भीख मांगते हो, शर्म नहीं आती है|"
<br />
<br />इसका श्रेय जाता है अक्षय को जो मेरे कॉलेज का मित्र था|
<br />Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1077375225166029022004-02-21T20:22:00.000+05:302004-02-23T21:24:14.640+05:30हिन्दी की बातेंहिन्दी की बातें बहुत होती है।
<br />हिन्दी में बातें कम होती है॥
<br /><strong>- प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी </strong>
<br />
<br />
<br />Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1077300032541155042004-02-20T23:08:00.000+05:302004-02-20T23:37:12.530+05:30पुनः प्यासाअर्ज किया है....
<br />
<br /> ये <strong>डॉक्यूमेंट</strong>, ये <strong>मीटींग</strong>, ये <strong>फीचर्स </strong>की दुनिया..
<br /> ये इन्सान के दुश्मन लम्बे घंटों की दुनिया..
<br /> ये <strong>डेडलाईन </strong>के भूखे <strong>मैनेजमेन्ट </strong>की दुनिया..
<br /> ये <strong>प्रोडक्ट </strong>अगर बन भी जाए तो क्या है....
<br /> ये <strong>प्रोडक्ट </strong>अगर बन भी जाए तो क्या है|
<br />
<br /> यहाँ पर खिलौना है <strong>प्रोग्रामर </strong>की हस्ती..
<br /> यहाँ बसती है फटीचर <strong>बग-फिक्सर </strong>की बस्ती..
<br /> यहाँ पर <strong>रेज़ज़ </strong>है <strong>इनफ्लेशन </strong>से सस्ती..
<br /> ये <strong>रिव्यूह </strong>अगर हो भी जाये तो क्या है..
<br /> ये <strong>रिव्यूह </strong>अगर हो भी जाये तो क्या है|
<br />
<br /> हर इक जिस्म घायल, हर इक रूह प्यासी..
<br /> दिमागों में उलझन, दिलों में उदासी..
<br /> ये <strong>ऑफिस </strong>है या आलम बदहवासी..
<br /> ये <strong>वर्झ़न </strong>अगर <strong>शिप </strong>हो जाये तो क्या है..
<br /> ये <strong>वर्झ़न </strong>अगर <strong>शिप </strong>हो जाये तो क्या है|
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<br /> यहाँ हर चीज़ पैसे से है तोली जाती..
<br /> ये ऐसा बाज़ार है जहाँ हर चीज़ है बिकती..
<br /> ईमान का ना तो मौल है ना धर्म की हस्ती..
<br /> ये पैसा अगर मिल भी जाये तो क्या है..
<br /> ये पैसा अगर मिल भी जाये तो क्या है|
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<br /> जला दो इसे फूँक डालो ये <strong>डॉक्यूमेन्ट</strong>..
<br /> जला दो... जला दो, फूँक डालो ये <strong>डॉक्यूमेन्ट</strong>..
<br /> मेरे सामने से हटा दो ये <strong>कमिट्मेन्ट</strong>..
<br /> तुम्हारा हैं तुम्ही सम्भालो ये <strong>डिपार्टमेन्ट</strong>..
<br /> ये गोली अगर चल भी जाये तो क्या है|
<br />Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1077267234091106612004-02-20T14:15:00.000+05:302004-02-20T14:31:08.310+05:30इंडिया शाइनिंग - भारत उदय<em>कृपया हास्य रस के साथ पढिये - यह राजनीती पर टिप्पणी नहीं है</em>
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<br />भारत के विकास का रहस्य हमारे प्रधानमंत्रीजी हैं -
<br />जिनके सर पर चांदी, मुहँ में स्वर्ण (<strong>silver </strong>hair and <strong>gold </strong>tooth)
<br />पैर में लोहा (<strong>steel </strong>rod)
<br />बालों में तेल और पेट में वायु (<strong>oil </strong>and <strong>natural gas</strong>)
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<br /><strong></strong>
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<br />भई अब देश की उन्नति का रहस्य जान गये ?Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-6463008.post-1077204640356661332004-02-19T20:55:00.000+05:302004-02-19T21:03:50.030+05:30हर सोमरस में भगवानजिन (Gin) में बसी जानकी, रम (Rum) में बसे राम|
<br />विस्की (Whisky) में बसे विष्णु, शैम्पेन (Champagne) में बसे श्याम|
<br />किस किस का त्याग करूँ, हर बोतल में भगवान|
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<br /><strong>ये मेरा कहना नहीं है, <em>चंद्रशेखर </em>ने भेजा है ....</strong>Sanjay Vyashttp://www.blogger.com/profile/18053955945230297508noreply@blogger.com